Surender Mohan Pathak
The Emperor of Hindi Crime Fiction
Surender Mohan Pathak is an author of Hindi-language crime fiction with nearly 300 novels to his credit. His writing career began in late 1950s. His first short story, 57 साल पुराना आदमी (The Man That Existed 57 Years Ago), was published by Manohar Kahaniya, a popular Hindi magazine, in 1959, and his first full length novel, Purane Gunah Naye Gunahgar, was published in 1963.
Unfiltered Thoughts
शाम ढले, चिराग जले ग्राहक की तालिब एक बाई सड़क पर खड़ी है। संभावित ग्राहक उसके करीब आता है, उससे अपेक्षित सवाल करता है, बाई कहती है – पाँच हजार, आठ हजार, दस हजार या जिस के भी काबिल वो हो। ग्राहक को रेट कुबूल है तो वाह वाह! दोनों राज़ी। नहीं कुबूल तो चलता […]
मैं बहुत शर्मसार हो कर कुबूल करता हूं कि ‘छमाही तीस लाख रॉयल्टी’ प्रकरण से पहले मैंने कभी वयोवृद्ध लेखक विनोद कुमार शुक्ल का नाम नहीं सुना था, न ही मैं उनके (अब) प्रसिद्ध उपन्यास ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ के नाम से वाकिफ था। रायपुर पुस्तक मेले में पुस्तक के मौजूदा प्रकाशक ने […]
‘वर्दी वाला गुंडा’ की आठ करोड़ प्रतियां बिकीं। पहले ही दिन पंद्रह लाख प्रतियां बिकीं। ये दो बहुत बड़े दावे हैं जिनको मैं सालों से सुनता आ रहा हूँ। और सुनने वाला मैं अकेला भी नहीं हूँ। मेरे अलावा न्यूजहाउन्ड हैं जो ऐसी न्यूज को कारोबारी अंदाज से भी लपकते हैं और मुसाहिबी अंदाज से […]